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चन्द्रमा की उत्पत्ति

चन्द्रमा की उत्पत्ति सृष्टि के आरम्भ में चांद नहीं था । आकाश में दो सूर्य चमकते थे । सूर्यो के पिता का नाम एपानजा था और मां का नाम लानब्वा...

चन्द्रमा की उत्पत्ति

सृष्टि के आरम्भ में चांद नहीं था । आकाश में दो सूर्य चमकते थे । सूर्यो के पिता का नाम एपानजा था और मां का नाम लानब्वाइ । एक दिन छोटे सूर्य ने बड़े भाई से कहा , " क्यों न हम धरती को तपा कर जला दें ।

बड़े सूर्य ने उत्तर दिया, मोसा करना अच्छा नहीं है। "

बड़े सूर्य का शरीर अत्यंत छोटा था और छोटा सूर्य बलवान था। उसने अपने बड़े भाई की बात नहीं मानी और पृथ्वी को अत्यधिक ताप से जलाने लगा। परिणामस्वरूप पृथ्वी के पेड़ - पौधे सूखने लगे । धूप की तपन से सभी प्राणी मरने लगे । नदी - नाले सूख गए ।

इदु लोगों के प्रमुख देवता आनया ने पृथ्वी के जीव - जन्तुओं को दुख से छुटकारा दिलाने के लिए आकाश के सभी देवताओं की सभा आयोजित की । देवताओं ने यह निर्णय लिया कि किसी एक देवता को बड़े सूर्य के पास जानकारी हासिल करने भेजा जाए । देवता आनया ने वहां जाने का मार्ग बताया ।

अब सूर्य के लिए उपहार ले जाने की बात उटी । एक देवता ने प्रस्ताव रखा कि उपहार के लिए चावल की मदिरा भेजना उपयुक्त रहेगा , किन्तु प्रानया ने उसे उचित नहीं समझा और कहा , “ मदिरा रखने के बांस के चोंगे तो हम मिसमी लोग व्यवहार में लाते हैं , इसलिए उनमें मदिरा भेजना उचित नहीं है । सूर्य को उपहार में देने के लिए सुअर , मुर्गे और चिड़ियां भेजी जाएं । " तभी से मिसमी लोग सूर्य देवता के लिए सुअर , मुर्गे और चिड़ियों की बलि चढ़ाते है।

आनया द्वारा भेजा गया देवता सूर्य के घर पहुंचा और उसने अपने साथ लाए हुए उपहार सूर्य को भेंट किए । बड़े सूर्य ने उस देवता का स्वागत किया । उससे पृथ्वी की दशा सुनकर वह क्रोधित हो गया । क्रोध में उसने अपने भाई छोटे सूर्य को पकड़ कर नीचे ढकेल दिया । छोटा सर्य कीचड़ के तालाब में आकर गिरा । तभी से छोटा सूर्य अपने बड़े भाई अर्थात् वड़े सूर्य से डरता है । वह तभी आकाश में आता है , जब बड़ा भाई विश्राम के लिए अपने घर चला जाता है । कीचड़ के तालाब में गिरने के कारण उसका शरीर कीचड़ से लथपथ हो गया । तभी से उसके शरीर में धब्बे दिखाई देते हैं और उसका प्रकाश भी शिथिल पड़ गया है । यही छोटा सूर्य आज चन्द्रमा के नाम से जाना जाता है।

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