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सिसाम नान देवी से क्षमा याचना

सिसाम नान देवी से क्षमा याचना बात उस समय की है जब कहीं घर या गांव नहीं थे । चारों ओर जंगल और पहाड़ थे । उन जंगलों और पहाड़ों का एक राजा था...

सिसाम नान देवी से क्षमा याचना

बात उस समय की है जब कहीं घर या गांव नहीं थे । चारों ओर जंगल और पहाड़ थे । उन जंगलों और पहाड़ों का एक राजा था जिसका नाम था किरु - कुमयुङ ग मुकाम - मिन्तोङ ग । राजा का एक छोटा भाई था - काइलु लिवाङ्ग और छोटी बहन थी सिबि जाताई । भाइयों ने एक दिन बहन से कहा - " सिवि जाताई , जंगल में जाकर पेड़ों को काट कर खेत बनाओ । उन खेतों में हम धान बोएंगे । "

इस पर सिबि जाताई ने उत्तर दिया , “ पेड़ों को काटने का काम तुम करो । जब काटे हुए पेड़ - पौधे सूख जाएंगे , तब मैं तुम्हें सहयोग दूंगी । " बहन की बात मान कर दोनों भाई जंगल में जाकर पेड़ काटने लगे । काटे हुए पेड़ - पौधों के सूख जाने पर उन्हें जलाकर खेत बनाया गया । खेत बम जाने पर भाइयों ने बहन से कहा , " सिबि जाताई , हमने कठोर परिश्रम कर खेत बना दिया है । अब तुम उसे साफ कर मनाज के बीज बो दो । "

सिबि जाताई ने कहा , " मैं बीज बोने के लिए नहीं बल्कि निराई के काम के लिए हो जाऊंगी । "

जब अनाज के पौधे कुछ बड़े हुए तब भाइयों ने अपनी बहन से उन्हें निराने के लिए कहा । सिबि जाताई ने इस काम को करने से भी इन्कार कर दिया और कहा- " मैं केवल अनाज पकने पर ही खेत में जाऊंगी । " अनाज पक कर तैयार होने पर भाइयों ने उसे खेत में जाने को कहा । सिबि जाताई ने इन्कार किया और कहा , " खेत में पेड़ के ऊपर मचान बन जाने के बाद ही में जाऊंगी । " भाइयों ने मचान बना दिया और उसे खेत में जाने के लिए कहा । सिबि जाताई ने इन्कार करते हुए कहा- - " मुझे मुरचंग वाजा बना कर दो , तभी मैं खेत में जाऊंगी । "

भाइयों ने उसे मुरचंग बाजा बना दिया । उसे लेकर सिबि जाताई खेत की रखवाली करने चली गई । सिबि जाताई रात भर खेत की रखवाली कर सुबह घर माती थी ।

एक दिन शाम के समय सिवि जाताई मचान में बैठ कर मुरचंग बजा रही थी । मुरचंग को अावाज सुनकर एक बन्दर मचान के ऊपर चढ़ पाया और नाचने लगा । बन्दर को नाचते देख कर सिबि जाताई हंस पड़ी । इस पर बन्दर ने कहा , " हंसती क्यों हो ? मुझे तुम्हारा वाद्य बहुत अच्छा लग रहा है । "

उस दिन के बाद बन्दर रोज आता था । जब सिबि जाताई गाती थी , तब बन्दर नाचता था और जब बन्दर गाता था , तब सिबि जाताई नाचती थी । इस प्रकार नाचने - गाने से दोनों एक दूसरे से प्रेम करने लगे । एक दिन बन्दर के साथ नाचते - नाचते सिबि जाताई के कपड़े फट गए 1 वह सुबह घर लौटी तो उसके भाइयों ने पूछा , " आज तुम्हें क्या हुआ ? तुम्हारे कपड़े फटे हुए है।

सिबि जाताई ने उत्तर दिया , “ एक जंगली सुअर खेत में पाया था , उसे भगाते समय काटे दार पौधों में उलझकर मेरे कपड़े फट गए हैं । "

कुछ सन्देह कर उसके बड़े भाई ने कहा , " तुम आज खेत में रखवाली के लिए नहीं जानोगी । प्राज मैं वहां जाऊंगा । " उसका भाई खेत में जा कर मचान की बगल में छुपा रहा । रोज की तरह बन्दर अपनी प्रेमिका से मिलने आया । उसे देखकर किरु - कुमयुङ ग मुकाम मिन्तोङ ग ने बन्दर को मार डाला ।

सुबह भाई के खेत से लौटने पर सिबि जाताई ने पूछा , " भाई , कल रात खेत में चोरी करने के लिए कोई जानवर आया था ? "

भाई ने कहा , " हां एक बन्दर अनाज चोरी करने के लिए आया था । उसे मैंने मार डाला । ' यह सुनकर सिबि जाताई रोने लगी और बोली , " बह मेरा प्रेमी था , तुमने उसे क्यों मार डाला ? मेरे गर्भ में उसका बच्चा भी है । जब बच्चा जन्मेगा , कौन उसकी देख - रेख करेगा और कौन उसका बाप बनेगा । "

किरु - कुमयुङग मुकाम मिन्तोङ ग ने कहा- " तुम राजा की बहन होकर बन्दर से प्रेम करती हो । तुम नीच हो । तुम मेरे घर से चली जानो । "

यह सब सुनकर सिबि जाताई घर छोड़ कर चली गई और जंगल में रहने लगी । जब बच्चे के जन्म का समय करीब आया तो वह आश्रय लेने के लिए एक जंगली सुअर के पास गई और बोली , ' मुझे तुम्हारे यहां आश्रय चाहिए , जहां मैं अपने बच्चे को जन्म दे सकू । "

इस पर सुअर ने कहा , “ तुमने मुझसे नहीं बल्कि बन्दर से शादी की है फिर भला मैं तुम्हें कैसे अपने घर में आश्रय दे सकता हूं ? "

इसके बाद सिवि जाताई जंगली कुत्ते के पास गई । कुत्ते ने भी इंकार कर दिया । वह क्रमशः जंगली भैसे , मृग आदि के पास गई । सभी ने उसे सुअर की तरह उत्तर दिया ।

अंत में सिबि जाताई ने एक खुले मैदान में प्राकर बच्चे को जन्म दिया । बच्चे का शरीर मनुष्य जैसा था , किन्तु चेहरा बन्दर की भांति था । सिबि जाताई ने बच्चे की रखवाली के लिए एक गिलहरी को रखा जब सिवि जाताई काम में व्यस्त होती उस समय बन्दर का बच्चा बहुत रोता । एक दिन क्रुद्ध होकर सिवि जाताई ने गिलहरी से कहा , " बच्चे को थोड़ी देर के लिए मुझसे दूर ले जाओ । गिलहरी वच्चे को पीठ पर लेकर कहीं दूर ले जा रही थी । रास्ते में लिजु लुपाङ्ग नाम की एक नदी पड़ती थी । उसे पार करने के लिए ज्यों ही गिलहरी नदी में कूदी , त्यों ही बच्चा पीठ से गिर गया और वहते हुए मछुए के जाल में फंस गया । मछुओं ने उसे पकड़ा और जंगली जानवर समझ कर मारकर खा गये ।

बहुत देर तक गिलहरी और बच्चे को न आता देख कर सिवि जाताई उन्हें खोजते हुए नदी तट पर गई । तट पर जहां मछुओं ने उसे मार कर खाया था वहां उसे बच्चे की हड्डियां विखरी हुई दिखाई दीं , वह रोती हुई माथुम मात्ता देवता के पास पहुंची और बोली , " देवता मुझे मेरे बच्चे से मिलायो।माथुम मात्ता ने कहा , " मैं तुम्हारी सहायता नहीं कर सकता । तुम मुफुङ ग तिङ गङ्ग - नान देवता के पास जाओ । "

वह रोती हुई मुफुङ्ग - तिङ्गङ ग - नान देवता के पास गई और उनसे अपनी विपदा कही ।

उसकी प्रार्थना पर देवता ने उसे रंग - विरंगे पर लगा दिए । देखते ही देखते सिवि जाताई सिसाम नान नाम की देवी बन गई । देवी बन कर उसे उन लोगों का पता चला जिन्होंने उसका वच्चा मार कर खाया था । वह वहां गई । जिस स्त्री ने उसके बच्चे का मांस पहले खाया था वह सिसाम नाम देवी से क्षमा याचना स्त्री गर्भवती थी । सिसाम नान उस स्त्री के पेट में घुस गई और बच्चे को बाहर निकालने के लिए खींचने लगी , वह स्त्री पीड़ा के कारण तड़पने लगी । पुरोहित ने गणना करके बताया , " सिसाम नान देवी को खुश करना होगा , तभी समस्या हल हो सकती है । "

लोगों ने देवी को खुश करने के लिए पशु - बली चढ़ा कर कहा , " हे देवी सिसाम नान । हमने तुम्हारे बच्चे को खाकर पाप कर्म किया है । अब हमें क्षमा कर दो । हम तुम्हारे प्रति कृतज्ञ रहेंगे और पशु बलि चढ़ा कर तुम्हारी पूजा करेंगे । "

देवी सिसाम नान ने उन्हें क्षमा कर दिया और वह स्त्री भी स्वस्थ हो गई । तभी से देवी सिसाम नान के नाम पर बलि पूजा चढ़ाने से पहले सिंङ गफो समाज में यह कहानी कहने का नियम है।

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