खरगोश की बुद्धि किसी समय एक नदी तट के जंगल में दो मिन , एक ऊदबिलाव तथा एक खरगोश रहते थे । एक दिन खरगोश ने ऊदविलाव से पूछा मिन , तुम कितनी ...
खरगोश की बुद्धि
किसी समय एक नदी तट के जंगल में दो मिन , एक ऊदबिलाव तथा एक खरगोश रहते थे । एक दिन खरगोश ने ऊदविलाव से पूछा मिन , तुम कितनी प्रकार की विद्या जानते हो ?
ऊदबिलाव ने उत्तर में कहा ,
" मैं उन्नीस प्रकार की विद्या जानता हूं ।"
फिर ऊदबिलाव ने खरगोश से पूछा तो खरगोश
ने कहा- "मित्र , मैं एक ही प्रकार की विद्या जानता हूं और वह भी
मामूली - सी है।
दोनों मित्र एक स्थान पर रहते थे । एक
दिन ऊदबिलाव मछुए के फन्दे में फंस गया । जब ऊदबिलाव बहुत देर तक लौट कर नहीं पाया
तो खरगोश को अपने मिन्न की चिन्ता हुई । वह उसे खोजते हुए मछुए के फन्दे तक जा पहुंचा
और अपने मित्र को मछुए के फन्दे में फंसा पाया । ऊद बिलाव बहुत चेष्टा करने पर भी
फन्दे से छुटकारा पाने में सफल नहीं हुआ था । खरगोश को देख कर उसने फंदे से छूटने
का उपाय बताने को कहा । इस पर खरगोश ने कहा , " मित्र , मैं केवल एक ही प्रकार की विद्या जानता हूं और वह भी बहुत ही मामूली
- सी है । तुम तो उन्नीस प्रकार की विद्या में पारंगत हो , फंदे से छुटकारा पाने का उपाय स्वयं
सोचो । ” ऊदबिलाव बहुत
शर्मिन्दा हुआ और वह खरगोश से सहायता के लिए गिड़गिड़ाने लगा ।
अन्त में तरस खा कर खरगोश ने ऊदबिलाव
से कहा , " मित्र
जब मछुपा अपने फन्दे के पास आएगा ,
तब तुम मृत जैसे बन जाना । जब वह तुम्हें मृत समझकर फन्दे से निकाल
कर रस्सी आदि खोजने लगेगा , तब
तुम भाग जाना या नदी में कूद जाना ।"
इतने में मछुआ वहां पहुंच गया । मछुए
ने ऊदबिलाव को मरा हुआ सोचकर फन्दे से निकाल कर जमीन पर रखा । लेकिन ऊदबिलाव को
उसी समय गाढ़ी नींद आ गई । खरगोश ने उसे जगाना चाहा मछुआ पास की एक झाड़ी में
रस्सी खोज रहा था । खरगोश को एक उपाय सूझा । वह लंगड़ाता हुआ मछुए के सामने से
निकला । उसे देखकर मछुआ उसे पाने के लिए लालायित हो गया । उसने खरगोश को पकड़ने के
लिए उसका पीछा किया । कुछ दूर पहुंचने पर खरगोश शीघ्र ही मछुए की नजर से बचकर अपने
मित्न ऊदबिलाव के पास पहुंचा और नींद से बेखबर ऊद बिलाव को जगा कर , उसे भागने या नदी में कूदने के लिए कहा
। नींद से जागकर ऊदबिलाव ने नदी में कूद कर मछुए के चंगुल से अपनी जान बचाई।
इसलिए कहा जाता है कि हमेशा बुद्धिमानों की संगति करनी चाहिए।

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