नागकन्या के चमत्कार बहुत पहले तारामोन मिसमी गांव में एक अनाथ युवक रहता था । वह एक दिन अपना जाल लेकर नदी में मछली पकड़ने गया । उस दिन मछली ...
नागकन्या के चमत्कार
बहुत पहले तारामोन मिसमी गांव में एक
अनाथ युवक रहता था । वह एक दिन अपना जाल लेकर नदी में मछली पकड़ने गया । उस दिन
मछली के स्थान पर उसके जाल में एक बहुत बड़ा नाग फंस गया।
जब नाग की कन्या ने देखा कि उसका पिता
जाल में फंस गया है , तो वह एक सुन्दर लड़की का रूप धारण कर युवक के
पास आकर बोली , “ यदि तुम मेरे पिता को छोड़ दो तो मैं तुमसे
विवाह करूंगी । " लड़की की सुन्दरता को देखकर युवक ने उसकी बात मान ली और जाल
में फंसे हुए सांप को मुक्त कर दिया।
किन्तु नाग को यह रिश्ता नहीं जंचा।
उसने अपनी कन्या से कहा " हम लोग सांप
जाति के हैं और तुम मनुष्य जाति के हो ऐसे में आप कैसे शादी कर सकती हो ?
" नागकन्या ने अपने पिता को मनाने की बहुत चेष्टा की किन्तु वह नहीं
माना। नाग अपनी कन्या को लेकर नदी में कूद गया और तारामोन युवक अपना सा मुंह लेकर
अपने घर लौट गया।
कुछ दिन बाद युवक फिर उसी नदी में मछली
पकड़ने आया । संयोग से नाग फिर जाल में फंस गया । पहले की ही तरह नाग - कन्या ने
पाकर युवक से विनती की , " मेरे पिताजी को छोड़ दो अब की बार मैं
तुमसे जरूर शादी करूंगी।"
युवक ने नाग - कन्या की विनती स्वीकार
कर ली और इस बार नाग - कन्या ने युवक से विवाह कर लिया।
गांव वालों ने जब युवक ताराप्रोन और
नाग - कन्या के विवाह की खबर सुनी तो बहुत नाराज हुए और इस बात की खबर राजा को दी
। राजा ने युवक को बुला कर कहा , “ तुमने समाज विरोधी काम किया है ,
इसलिए
तुम्हारे और मेरे मुर्गे की आपस में लड़ाई होगी । यदि मेरा मुर्गा हारेगा तो मैं
देश छोड़ कर चला जाऊंगा , नहीं तो तुम्हें जाना होगा।"
घर आकर युवक ने सारी बात अपनी पत्नी को
बताई । नाग - कन्या ने कहा , “ इसमें डरने की क्या बात है । मैं अपने
पिताजी से एक मुर्गा मांग कर लाती हूं । " यह कहकर वह नाग - लोक से एक मुर्गा
ले आई।
दूसरे दिन युवक मुर्गे को लेकर राजा के
घर पहुंचा । नाग - लोक का मुर्गा बहुत बलवान था , इसलिए उसने
आसानी से राजा के मुर्गे को पराजित कर दिया।
राजा ने युवक से कहा , " इससे
फैसला नहीं हो पाया है इसलिए लोहित नदी में बांध बनाकर जल - क्रीड़ा की प्रतियोगिता
होनी चाहिए । " युवक इस शर्त से भयभीत हो गया । उसके लिए लोहित नदी मे बांध
बनाना असंभव था ।
नाग - कन्या ने युवक को धीरज बंधाते
हुए कहा , " डरो मत , मेरे पिताजी
तुम्हारी मदद करेंगे । " वह अपने पिता के घर से सोने की सुन्दर टोकरी ले आई ।
जैसे ही नाग - कन्या ने टोकरी लोहित नदी की धारा में डुबाई वैसे ही नदी का बहाव
उलटकर राजा के घर के आंगन तक पहुंच गया । तब युवक ने राजा से कहा , " राजा
, अन्तिम बार भी मेरी ही विजय हुई है । शर्त के अनुसार तुम्हें अब देश
छोड़कर चले जाना चाहिए । "
यह सुनकर राजा ने कहा , " इस
निर्णय को भी अन्तिम नहीं माना जाएगा । अब हमें युद्ध करना चाहिए । इस युद्ध में
जिसकी जीत होगी वही विजयी घोषित किया जाएगा । " राजा के पास बहुत बड़ी फौज थी
। किन्तु युवक अकेला था , उसके पास अपनी पत्नी नाग - कन्या के
सिवाय कोई नहीं था । नाग - कन्या को इस समस्या का एक उपाय सूझा । वह नदी के भीतर
चली गई और वहां से सोने का ढोल तथा बजाने की छड़ी ले आई । राजा अपनी सेनाओं के साथ
लड़ाई के लिए आया।
राजा को आते हुए देखकर नाग - कन्या ने ढोल बजाया , ढोल की सुमधुर ध्वनि सुनकर घास - पत्ते , पेड़ , घर आदि सभी खुशी से नाचने लगे । राजा और उसकी सेनाएं भी हथियार फेंककर नाचने लगीं । नाचते - नाचते वे थक गए । युवक ने उन्हें मछली पकड़ने के जाल में फंसाकर अपने वश में कर लिया । इसके बाद युवक उस देश का राजा बना और नाग - कन्या रानी । आज भी अरुणाचल के वंशज ताराप्रोन जनजाति के नाम से जाने जाते हैं।

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