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गणेश चतुर्थी 10 सितम्बर 2021

गणेश चतुर्थी व्रत  महापर्व Ganesh chaturthi 10 september 2021 भारतीय हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व रहता है। भाद्रपस मास के शुक्...

गणेश चतुर्थी व्रत महापर्व

Ganesh chaturthi 10 september 2021
भारतीय हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व रहता है। भाद्रपस मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं। सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी का यह महापर्व इस साल 10 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन भगवान विगनहर्ता गणेश जी विराजमान रहेंगे और 19 सितंबर अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी को श्रद्धा पूर्वक विदा किया जाएगा।

गणेश चतुर्थी पूजा शुभ मुहूर्त

मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - 10:53 AM  से 01:23 PM

अवधि - 02 घण्टे 30 मिनट्स

गणेश विसर्जन- रविवार 19 सितम्बर 2021 को

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:03 AM से 08:42 PM

अवधि - 11 घण्टे 40 मिनट्स

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 10 सितम्बर 2021 को 12:18 AM

चतुर्थी तिथि समाप्त – 10 सितम्बर 2021 को 09:57 PM

भगवान गणेश जी को लगाए भोग

भगवान गणेश जी को पूजन के समय बूदी के बने हुए लडडू का भोग अवश्य लगाना चाहिए ऐसा करने से भगवान गणेश जी अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

भगवान गणेश चतुर्थी संक्षिप्त पूजा विधि 

गणेश चतुर्थी के दिन प्रात काल उठकर स्नान ध्यान करने के उपरांत गणेश जी का व्रत का संकल्प लें इसके बाद गणेश जी की मूर्ति या उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें फिर गंगाजल छिड़क कर भगवान गणेश जी का ध्यान करें आवान करें, स्नान करा कर सुंदर वस्त्र व जनेऊ पहनऐ, कुमकुम पिठया लगाकर गणेश जी की पूजा अर्चना दूर्वा व मोदक (लड्डू) मंत्रोच्चारण के साथ पूजन करें उसके उपरांत गणेश जी की कथा पढें और अंत में आरती करें। 

गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी भी कहते है

भाद्रपस शुक्ल चतुर्थी के दिन चन्द्रदर्शन होने पर मिथ्या कलंक लगता है। इसका अभिप्राय यह है कि चतुर्थी तिथि में चन्द्र - उदय होकर पंचमी तिथि तक वर्तमान हो अर्थात् चन्द्र - अस्त पंचमी तिथि में हो तो सिद्धिविनायक व्रत के दिन चन्द्रदर्शन करना या होना दोषकारक नहीं होता तथा यदि पहिले दिन सायंकाल से चतुर्थी प्रारम्भ हो जाए अर्थात् तृतीया में चन्द्रोदय होकर चतुर्थी की व्याप्ति तक चन्द्रदर्शन हो ( चन्द्र अस्त चतुर्थी तिथि में हो ) तो चन्द्रदर्शन का दोष पहिले दिन होगा , चाहे उस दिन सिद्धिविनायक व्रत न भी हो । निष्कर्ष यह है कि चतुर्थी में ही चन्द्रदर्शन का दोष है सिद्धिविनायक व्रत का इससे सम्बन्ध नहीं है जोकि मध्याह्न - व्यापिनी ग्राह्य होता है चतुर्थ्यामुदितस्य पंचम्यां दर्शनं विनायकव्रत दिनेपि न दोषाय पूर्वदिने सायाह्नमारम्भ प्रवृत्तायां चतुर्थ्यां विनायकव्रताभावेपि पुर्वेधुरेव चंद्रदर्शने दोष इति सिध्यति । .......... इदानीं लोकास्त्वेकतरपक्षाश्रयेण विनायक व्रतदिने एवं चंद्रं न पश्चयन्ति न तदयकाले दर्शनकाले व चतुर्थीसत्त्वासत्त्वे नियमेनाश्रयन्ति ।। ( धर्मसिन्धु )

परन्तु इस उपरोक्त नियम की उपेक्षा करते हुए लोक - परम्परानुसार महाराष्ट्र , गुजरातादि कुछ राज्यों में लोग सिद्धि - विनायक व्रत वाले दिन ही चन्द्रदर्शन का निषेध मानते हैं । चाहे उस दिन सायंकाल पंचमी तिथि व्याप्ति में ही चन्द्रास्त हो अर्थात् पंचमी तिथि तक चन्द्रमा के दर्शन हो रहे हों । वे उदयकाल या दर्शनकाल में चतुर्थी होने या न होने पर चन्द्रदर्शन के नियम को नहीं मानते । जबकि पंजाब , हिमाचल , जम्मू , हरियाणादि उत्तरी | भारत में चतुर्थी तिथि व्यापिनी में ही चन्द्रदर्शन का दोष मानते हैं ।

कृत्य - भाद्र . शुक्ल चतुर्थी सिद्धिविनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है । इसमें किया गया दान , स्नान , उपवास और अर्चन गणेश जी की कृपा से सौ गुना हो जाता है , | परन्तु इस चतुर्थी को चन्द्रदर्शन का निषेध किया गया है । इसदिन चन्द्रदर्शन से मिथ्या कलंक लगता है । अतः इस तिथि को चन्द्रदर्शन न हो , ऐसी सावधानी रखनी चाहिए । यदि दैववशात् चन्द्रदर्शन हो जाए तो इस दोष शमन के लिए निम्न मन्त्र का पाठ करना चाहिए –

सिंहः प्रसेनमवधीसिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।। (विष्णुपुराण ४/१३/४२)

और स्यमन्तक - मणि की कथा पढ़नी / सुननी चाहिए। 

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